11-40 economist
📚 अर्थशास्त्री और उनके सिद्धांत
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📖 विषय-सूची
1. अल्फ्रेड मार्शल (Alfred Marshall) 1890
📖 परिचय
अल्फ्रेड मार्शल ब्रिटिश अर्थशास्त्री, नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्र के संस्थापकों में से एक। उन्होंने सूक्ष्मअर्थशास्त्र को व्यवस्थित रूप दिया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Principles of Economics" (1890)
🎯 सिद्धांत की मुख्य मान्यताएँ
- उपयोगिता को कार्डिनल (संख्यात्मक) रूप में मापा जा सकता है
- उपभोक्ता तर्कसंगत है और अपनी संतुष्टि अधिकतम करना चाहता है
- सीमांत उपयोगिता ह्रासमान होती है
- आय और कीमतें स्थिर हैं
📌 मुख्य निष्कर्ष
- ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम: प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से मिलने वाली अतिरिक्त संतुष्टि घटती जाती है
- उपभोक्ता अधिशेष: भुगतान करने की अधिकतम इच्छा और वास्तविक कीमत के बीच का अंतर
- मांग की कीमत लोच की अवधारणा दी
- अल्पकाल और दीर्घकाल में उत्पादन लागत का विश्लेषण
🔢 सूत्र
✅ एक-पंक्ति संशोधन
मार्शल = कार्डिनल उपयोगिता, ह्रासमान MU, उपभोक्ता अधिशेष, मांग की लोच।
2. जॉन हिक्स (John Hicks) 1939
📖 परिचय
ब्रिटिश अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1972), सामान्य संतुलन और कल्याण अर्थशास्त्र में योगदान।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Value and Capital" (1939)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- उपयोगिता क्रमिक (Ordinal) होती है – केवल रैंकिंग मायने रखती है
- उपभोक्ता की प्राथमिकताएँ सकर्मक (Transitive) और पूर्ण (Complete) होती हैं
- अनधिमान वक्र (IC) नीचे की ओर ढालान वाले और उत्तल होते हैं
- प्रतिस्थापन की सीमांत दर (MRS) ह्रासमान होती है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- अनधिमान वक्र विश्लेषण: उपभोक्ता संतुलन IC और बजट रेखा के स्पर्श बिंदु पर
- MRS: एक वस्तु की वह मात्रा जिसे उपभोक्ता दूसरी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई पाने के लिए छोड़ने को तैयार है
- प्रतिस्थापन प्रभाव (SE) और आय प्रभाव (IE) का अलगाव
- हिक्सियन मांग (Compensated Demand)
🔢 सूत्र
✅ एक-पंक्ति संशोधन
हिक्स = क्रमिक उपयोगिता, IC विश्लेषण, MRS, हिक्सियन मांग, SE और IE का अलगाव।
3. यूजीन स्लटस्की (Eugen Slutsky) 1915
📖 परिचय
रूसी अर्थशास्त्री और गणितज्ञ, सांख्यिकीविद्। उन्होंने मांग सिद्धांत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"On the Theory of the Budget of the Consumer" (1915) – जर्नल आर्टिकल
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- उपभोक्ता तर्कसंगत है और उपयोगिता अधिकतम करता है
- कीमत परिवर्तन के दो प्रभाव होते हैं: प्रतिस्थापन और आय प्रभाव
- स्लटस्की मानक (Slutsky norm) – क्षतिपूर्ति के लिए मूल बंडल को क्रय करने योग्य बनाए रखना
📌 मुख्य निष्कर्ष
- स्लटस्की समीकरण: $$\frac{\partial x_i}{\partial p_j} = \frac{\partial x_i^c}{\partial p_j} - x_j \frac{\partial x_i}{\partial m}$$
- कीमत परिवर्तन के कुल प्रभाव = प्रतिस्थापन प्रभाव + आय प्रभाव
- प्रतिस्थापन प्रभाव सदैव ऋणात्मक होता है
- गिफेन वस्तुओं की व्याख्या – धनात्मक आय प्रभाव, ऋणात्मक प्रतिस्थापन प्रभाव से अधिक मजबूत
✅ एक-पंक्ति संशोधन
स्लटस्की = स्लटस्की समीकरण, TE = SE + IE, गिफेन वस्तुओं की व्याख्या, मांग सिद्धांत का आधार।
4. हरमन गोसेन (Hermann Gossen) 1854
📖 परिचय
जर्मन अर्थशास्त्री, सीमांत क्रांति (Marginal Revolution) के अग्रदूत। उन्हें मार्जिनलिस्ट क्रांति का जनक कहा जाता है।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Entwickelung der Gesetze des menschlichen Verkehrs" (1854)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- मनुष्य अपनी संतुष्टि को अधिकतम करना चाहता है
- सीमांत उपयोगिता ह्रासमान होती है
- विभिन्न वस्तुओं के बीच उपभोक्ता अपने संसाधनों का आवंटन करता है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- पहला नियम (ह्रासमान सीमांत उपयोगिता): एक ही वस्तु की लगातार अधिक इकाइयों के उपभोग से सीमांत उपयोगिता घटती है
- दूसरा नियम (समान सीमांत उपयोगिता): उपभोक्ता अपनी आय को इस प्रकार आवंटित करता है कि प्रत्येक वस्तु पर खर्च किए गए अंतिम रुपये से प्राप्त सीमांत उपयोगिता समान हो
- $$\frac{MU_1}{P_1} = \frac{MU_2}{P_2} = ... = \frac{MU_n}{P_n}$$
✅ एक-पंक्ति संशोधन
गोसेन = ह्रासमान MU (पहला नियम) और समान सीमांत उपयोगिता (दूसरा नियम) – उपभोक्ता संतुलन का आधार।
5. विलियम स्टैनली जेवन्स (William Stanley Jevons) 1871
📖 परिचय
अंग्रेजी अर्थशास्त्री, सीमांत क्रांति के प्रमुख हस्ताक्षर। उन्होंने मूल्य निर्धारण में सीमांत उपयोगिता के महत्व को स्थापित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Theory of Political Economy" (1871)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- उपयोगिता कार्डिनल (संख्यात्मक) होती है
- मूल्य सीमांत उपयोगिता पर निर्भर करता है, कुल उपयोगिता पर नहीं
- मनुष्य आर्थिक गणना (hedonic calculus) करने में सक्षम है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- जल-हीरा विरोधाभास (Water-Diamond Paradox) का समाधान: पानी की कुल उपयोगिता अधिक पर सीमांत उपयोगिता कम (प्रचुरता के कारण), हीरे की कुल उपयोगिता कम पर सीमांत उपयोगिता अधिक (दुर्लभता के कारण)
- मूल्य सीमांत उपयोगिता से निर्धारित होता है
- विनिमय का सिद्धांत – दो व्यक्ति तब तक व्यापार करेंगे जब तक उनकी सीमांत उपयोगिताएँ समान न हो जाएँ
✅ एक-पंक्ति संशोधन
जेवन्स = कार्डिनल उपयोगिता, जल-हीरा विरोधाभास का समाधान, मूल्य = सीमांत उपयोगिता।
6. पॉल सैमुएलसन (Paul Samuelson) 1947
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, प्रथम अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता (1970) "Foundations of Economic Analysis" के लिए प्रसिद्ध।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Foundations of Economic Analysis" (1947) में प्रकट वरीयता सिद्धांत प्रस्तुत किया गया।
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- उपयोगिता को मापने की आवश्यकता नहीं – केवल वास्तविक चुनाव देखें
- उपभोक्ता के बाजार व्यवहार से उसकी प्राथमिकताएँ प्रकट (reveal) हो जाती हैं
- प्राथमिकताएँ सुसंगत (consistent) होती हैं
- उपभोक्ता बजट बाधा के अधीन अपनी वरीयता को प्रकट करता है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- कमजोर अभिगृहीत (WARP): यदि बंडल A, बंडल B पर सीधे प्रकट वरीय है, तो B, A पर प्रकट वरीय नहीं हो सकता
- प्रबल अभिगृहीत (SARP): सकर्मकता (transitivity) को भी शामिल करता है
- प्रकट वरीयता सिद्धांत उपयोगिता सिद्धांत का विकल्प है
- यह बिना उपयोगिता मापे मांग वक्र को स्थापित करता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
सैमुएलसन (प्रकट वरीयता) = बाजार में चुनाव ही प्राथमिकता प्रकट करते हैं, WARP/SARP सुसंगति की शर्तें।
7. रेने रॉय (René Roy) 1947
📖 परिचय
फ्रांसीसी अर्थशास्त्री, इंजीनियर। उन्होंने अप्रत्यक्ष उपयोगिता फलन और मांग के बीच संबंध स्थापित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"La hiérarchie des besoins" (1943) और 1947 के जर्नल लेख।
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- उपभोक्ता उपयोगिता अधिकतम करता है
- अप्रत्यक्ष उपयोगिता फलन v(p,m) = max U(x) subject to p·x ≤ m
- उपयोगिता फलन अवकलनीय और उत्तल है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- रॉय की पहचान (Roy's Identity): $$x_i(p,m) = -\frac{\partial v(p,m)/\partial p_i}{\partial v(p,m)/\partial m}$$
- यह बताती है कि अप्रत्यक्ष उपयोगिता फलन से सीधे मार्शलियन मांग फलन कैसे प्राप्त किया जाए
- यह द्वैतता (duality) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है
- शेफर्ड लेम्मा का उपभोक्ता सिद्धांत में समकक्ष
✅ एक-पंक्ति संशोधन
रॉय = अप्रत्यक्ष उपयोगिता फलन से मार्शलियन मांग निकालने का सूत्र – द्वैतता का आधार।
8. वासिली लियोन्टीफ (Wassily Leontief) 1941
📖 परिचय
रूसी-अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1973)। इनपुट-आउटपुट तालिकाओं के विकासकर्ता।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Structure of American Economy, 1919-1929" (1941)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- स्थिर गुणांक (Fixed coefficients) – उत्पादन फलन में इनपुट का अनुपात निश्चित
- पैमाने पर निरंतर प्रतिफल (CRS)
- कोई प्रतिस्थापन नहीं
- उद्योगों के बीच अंतर-निर्भरता
📌 मुख्य निष्कर्ष
- लियोन्टीफ उत्पादन फलन: $Q = \min\left(\frac{L}{a}, \frac{K}{b}\right)$
- I-O विश्लेषण सूत्र: $X = (I - A)^{-1} F$
- लियोन्टीफ विरोधाभास (1953): अमेरिका (पूंजी-प्रचुर) पूंजी-गहन निर्यात न करके श्रम-गहन निर्यात करता है – हेक्शर-ओलिन थ्योरी के विपरीत
- गुणक प्रभाव – एक उद्योग में निवेश से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
लियोन्टीफ = I-O मॉडल (X=(I-A)⁻¹F), लियोन्टीफ फलन (min), लियोन्टीफ विरोधाभास (H-O के विपरीत)।
9. एरो, चेनरी, सोलो (Arrow, Chenery, Solow) 1961
📖 परिचय
केनेथ एरो, होलिस चेनरी, रॉबर्ट सोलो – तीनों ने मिलकर CES उत्पादन फलन प्रस्तावित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक/लेख
"Capital-Labor Substitution and Economic Efficiency" – Review of Economics and Statistics (1961)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- प्रतिस्थापन की लोच (σ) स्थिर होती है
- दो इनपुट – श्रम (L) और पूंजी (K)
- पैमाने पर स्थिर/चर प्रतिफल
- उत्तम प्रतिस्पर्धा
📌 मुख्य निष्कर्ष
- CES फलन: $Q = A[\delta K^{-\rho} + (1-\delta)L^{-\rho}]^{-1/\rho}$
- प्रतिस्थापन लोच: $\sigma = \frac{1}{1+\rho}$
- यदि $\rho \to 0 \Rightarrow \sigma \to 1$ (Cobb-Douglas)
- यदि $\rho \to \infty \Rightarrow \sigma \to 0$ (Leontief)
- यदि $\rho \to -1 \Rightarrow \sigma \to \infty$ (Perfect Substitutes)
✅ एक-पंक्ति संशोधन
CES = स्थिर प्रतिस्थापन लोच, σ = 1/(1+ρ), कोब-डगलस और लियोन्टीफ इसके विशेष मामले।
10. रोनाल्ड शेफर्ड (Ronald Shephard) 1953
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, उत्पादन और लागत सिद्धांत में द्वैतता (duality) के अग्रदूत।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Cost and Production Functions" (1953)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- फर्म लागत न्यूनीकरण करती है
- उत्पादन फलन सतत और अवकलनीय है
- इनपुट कीमतें बहिर्जात हैं
- लागत फलन उत्तल (convex) है
📌 मुख्य निष्कर्ष
- शेफर्ड लेम्मा: $$\frac{\partial C(w,r,Q)}{\partial w} = L^*(w,r,Q) \quad \text{और} \quad \frac{\partial C(w,r,Q)}{\partial r} = K^*(w,r,Q)$$
- लागत फलन का इनपुट कीमत के सापेक्ष आंशिक अवकलज = उस इनपुट की सशर्त (conditional) माँग
- यह द्वैतता का मूल स्तंभ है – उत्पादन और लागत फलन एक-दूसरे के द्वैत हैं
✅ एक-पंक्ति संशोधन
शेफर्ड = लागत फलन के अवकलज से सशर्त इनपुट माँग; रॉय (उपभोक्ता) का उत्पादक समकक्ष।
11. कॉब और डगलस (Charles Cobb & Paul Douglas) 1928
📖 परिचय
चार्ल्स कॉब (गणितज्ञ) और पॉल डगलस (अर्थशास्त्री, बाद में सीनेटर) ने मिलकर यह फलन विकसित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक/लेख
"A Theory of Production" – American Economic Review (1928)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- सूत्र: $Q = A L^\alpha K^\beta$
- प्रतिस्थापन लोच (σ) = 1 (यह अद्वितीय विशेषता है)
- α = श्रम का आय-हिस्सा, β = पूंजी का आय-हिस्सा
- α+β = 1 ⇒ CRS; >1 ⇒ IRS; <1 ⇒ DRS
- लॉग-लॉन्ग रूप: $\ln Q = \ln A + \alpha \ln L + \beta \ln K$
✅ एक-पंक्ति संशोधन
कॉब-डगलस = σ=1, α+β = पैमाने का प्रतिफल, α और β कारकों के आय-हिस्से।
12. ऑगस्टिन कूरनो (Augustin Cournot) 1838
📖 परिचय
फ्रांसीसी गणितज्ञ एवं अर्थशास्त्री, गणितीय अर्थशास्त्र के जनक। कूरनो द्विसताकार मॉडल गेम थ्योरी के प्रथम मॉडलों में से एक है।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Recherches sur les principes mathématiques de la théorie des richesses" (1838)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- दो फर्में समरूप (homogeneous) उत्पाद बनाती हैं
- वे मात्रा (Quantity) पर प्रतिस्पर्धा करती हैं – प्रतिद्वंद्वी की मात्रा को स्थिर मानती हैं
- प्रवेश और निकास बाधित (barriers to entry)
- फर्में एक ही समय में निर्णय लेती हैं (simultaneous game)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- प्रतिक्रिया फलन: $q_1 = \frac{a-c}{2b} - \frac{1}{2}q_2$
- कूरनो संतुलन: $q_1 = q_2 = \frac{a-c}{3b}$, $P = \frac{a+2c}{3}$
- n फर्मों के लिए: $q_i = \frac{a-c}{b(n+1)}$, $Q = \frac{n}{n+1} \cdot \frac{a-c}{b}$
- जैसे $n \to \infty$, $P \to c$ (पूर्ण प्रतिस्पर्धा)
✅ एक-पंक्ति संशोधन
कूरनो = मात्रा पर प्रतिस्पर्धा, प्रतिक्रिया फलन, एक साथ निर्णय, P>MC, n फर्मों का सामान्यीकरण।
13. जोसेफ बर्ट्रांड (Joseph Bertrand) 1883
📖 परिचय
फ्रांसीसी गणितज्ञ और अर्थशास्त्री। उन्होंने कूरनो के मॉडल की समीक्षा करते हुए अपना वैकल्पिक मॉडल प्रस्तावित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक/लेख
"Book Review of Cournot's Researches" – Journal des Savants (1883)
🎯 मुख्य मान्यताएँ
- दो फर्में समरूप उत्पाद बनाती हैं
- वे कीमत (Price) पर प्रतिस्पर्धा करती हैं – प्रतिद्वंद्वी की कीमत को स्थिर मानती हैं
- उत्पादन की कोई सीमा नहीं (unlimited capacity)
- उपभोक्ता सबसे सस्ती फर्म से खरीदते हैं
📌 मुख्य निष्कर्ष
- बर्ट्रांड विरोधाभास: $P_1 = P_2 = c$ (प्रतिस्पर्धी कीमत) – दो फर्में भी पूर्ण प्रतिस्पर्धा जैसा परिणाम देती हैं
- लाभ शून्य होता है
- यदि उत्पाद विभेदित हों, तो $P > c$ और लाभ धनात्मक हो सकता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
बर्ट्रांड = कीमत पर प्रतिस्पर्धा, P=MC, लाभ शून्य – बर्ट्रांड विरोधाभास।
14. हेनरिक वॉन स्टैकेलबर्ग (Heinrich von Stackelberg) 1934
📖 परिचय
जर्मन अर्थशास्त्री, क्रमिक निर्णय (sequential decision) का मॉडल देने वाले पहले विद्वान।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Marktform und Gleichgewicht" (Market Structure and Equilibrium) – 1934
📌 मुख्य निष्कर्ष
- नेता का आउटपुट: $q_L = \frac{a-c}{2b}$, अनुयायी: $q_F = \frac{a-c}{4b}$
- कुल: $Q = \frac{3(a-c)}{4b}$, $P = \frac{a+3c}{4}$
- नेता का लाभ अनुयायी से दोगुना: $\pi_L = \frac{(a-c)^2}{8b}$, $\pi_F = \frac{(a-c)^2}{16b}$
- प्रथम-चालक लाभ (First-mover advantage)
✅ एक-पंक्ति संशोधन
स्टैकेलबर्ग = क्रमिक निर्णय, नेता पहले चलता है, अनुयायी प्रतिक्रिया करता है, नेता को अधिक लाभ।
15. पॉल स्वीज़ी (Paul Sweezy) 1939
📖 परिचय
अमेरिकी मार्क्सवादी अर्थशास्त्री, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। अल्पाधिकार (oligopoly) में कीमत स्थिरता की व्याख्या के लिए प्रसिद्ध।
📚 प्रमुख लेख
"Demand Under Conditions of Oligopoly" – Journal of Political Economy (1939)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- टेढ़ी मांग वक्र (Kinked Demand Curve): कीमत बढ़ाने पर मांग बहुत लोचदार, कीमत घटाने पर मांग बेलोचदार
- MR वक्र में ऊर्ध्वाधर अंतराल: जब तक MC इस अंतराल के भीतर रहता है, कीमत स्थिर रहती है
- यह अल्पाधिकार में कीमत स्थिरता (price rigidity) की व्याख्या करता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
स्वीज़ी = टेढ़ी मांग वक्र, अल्पाधिकार में कीमत स्थिरता, MR में अंतराल।
16. एडवर्ड चेम्बरलिन (Edward Chamberlin) 1933
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा सिद्धांत के जनक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Theory of Monopolistic Competition" (1933)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- उत्पाद विभेदन (Product differentiation) + मुक्त प्रवेश (free entry)
- दीर्घकालीन संतुलन: $P = AC$ (लाभ शून्य), $P > MC$
- अतिरिक्त क्षमता (Excess capacity): फर्म $AC_{\min}$ से कम उत्पादन करती है
- विज्ञापन (advertising) उत्पाद विभेदन का एक औजार है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
चेम्बरलिन = एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा, उत्पाद विभेदन, मुक्त प्रवेश, दीर्घकाल में शून्य लाभ, अतिरिक्त क्षमता।
17. जो एस. बैन (Joe S. Bain) 1956
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, बर्कले विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। प्रवेश बाधाओं और सीमा मूल्य निर्धारण के सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Barriers to New Competition" (1956)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- सीमा कीमत (Limit Price): अधिकतम कीमत जो स्थापित फर्म वसूल सकती है बिना नए प्रवेश को आकर्षित किए
- प्रवेश बाधाओं के 3 स्रोत: (i) पूर्ण लागत लाभ (Absolute cost advantage) (ii) उत्पाद विभेदन (Product differentiation) (iii) पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ (Economies of scale)
- लर्नर सूचकांक: $L = \frac{P - MC}{P}$
✅ एक-पंक्ति संशोधन
बैन = सीमा मूल्य निर्धारण (प्रवेश रोकना), 3 प्रकार की प्रवेश बाधाएँ, लर्नर इंडेक्स।
18. फ्रांसिस एजवर्थ (Francis Edgeworth) 1881
📖 परिचय
आयरिश अर्थशास्त्री और सांख्यिकीविद्, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। गणितीय अर्थशास्त्र के अग्रणी।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Mathematical Psychics: An Essay on the Application of Mathematics to the Moral Sciences" (1881)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- सीमित क्षमता (capacity constraints) + कीमत प्रतिस्पर्धा
- कोई शुद्ध नैश संतुलन (pure Nash equilibrium) नहीं होता
- मिश्रित रणनीति संतुलन (Mixed strategy equilibrium): कीमतें चक्रीय (price cycles) होती हैं
- एजवर्थ का बॉक्स (Edgeworth Box) – विनिमय अर्थशास्त्र का मूल आरेख
✅ एक-पंक्ति संशोधन
एजवर्थ = सीमित क्षमता + कीमत प्रतिस्पर्धा → मूल्य चक्र (price cycles), कोई शुद्ध नैश संतुलन नहीं।
19. फ्रांसिस अमासा वॉकर (Francis Amasa Walker) 1876
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, एमआईटी के संस्थापक अध्यक्ष, अमेरिकी आर्थिक संघ (AEA) के संस्थापक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Wages Question" (1876), "Political Economy" (1883)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- लाभ = अवशिष्ट आय (Residual Income): $\pi = TR - (w + r + i)$
- उद्यमी की प्रबंधकीय दक्षता का पुरस्कार
- अधिक कुशल उद्यमी अधिक लाभ कमाते हैं
- पूंजीपति (ब्याज) और उद्यमी (लाभ) अलग-अलग हो सकते हैं
✅ एक-पंक्ति संशोधन
वॉकर = लाभ उद्यमी का अवशिष्ट आय, प्रबंधकीय क्षमता का पुरस्कार – सभी कारकों को भुगतान के बाद बचा हुआ।
20. फ्रैंक नाइट (Frank Knight) 1921
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, शिकागो स्कूल के संस्थापकों में से एक, "Risk, Uncertainty and Profit" के लेखक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Risk, Uncertainty and Profit" (1921)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- जोखिम (Risk) बनाम अनिश्चितता (Uncertainty): जोखिम measurable (बीमायोग्य), अनिश्चितता non-measurable (अबीमायोग्य)
- लाभ का एकमात्र स्रोत अनिश्चितता है: जोखिम तो लागत है (बीमा प्रीमियम)
- अनिश्चितता का सामना उद्यमी के निर्णय और अंतर्ज्ञान से होता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
नाइट = लाभ अनिश्चितता (non-insurable) का पुरस्कार, जोखिम (insurable) तो लागत है – Risk ≠ Uncertainty।
21. जोसेफ शुम्पीटर (Joseph Schumpeter) 1911
📖 परिचय
ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री, हार्वर्ड प्रोफेसर, "सृजनात्मक विनाश" (Creative Destruction) के जनक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Theory of Economic Development" (1911 जर्मन, 1934 अंग्रेजी)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- लाभ केवल नवाचार (innovation) से उत्पन्न होता है – स्थिर अवस्था (circular flow) में लाभ शून्य
- नवाचार के 5 प्रकार: नया उत्पाद, नई विधि, नया बाजार, नया स्रोत, नया संगठन
- सृजनात्मक विनाश (Creative Destruction): नवाचार पुराने को नष्ट करता है, नया सृजन करता है
- नवाचार से अस्थायी एकाधिकार (temporary monopoly) और अस्थायी लाभ
✅ एक-पंक्ति संशोधन
शुम्पीटर = लाभ नवाचार का अस्थायी पुरस्कार, सृजनात्मक विनाश, नकल (imitation) से लाभ समाप्त।
22. जॉन बेट्स क्लार्क (John Bates Clark) 1899
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, सीमांत उत्पादकता सिद्धांत (Marginal Productivity Theory) के जनक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Distribution of Wealth" (1899)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- स्थैतिक अवस्था (Static State): जनसंख्या, पूंजी, तकनीक स्थिर – लाभ शून्य
- गतिशील परिवर्तन (Dynamic Change): लाभ उत्पन्न करता है
- 5 गतिशील परिवर्तन: जनसंख्या वृद्धि, पूंजी वृद्धि, तकनीक सुधार, उपभोक्ता पसंद बदलाव, उत्पादन संगठन बदलाव
- क्लार्क का नियम: $MP_L = w$, $MP_K = r$ (प्रतिस्पर्धा में)
✅ एक-पंक्ति संशोधन
क्लार्क = स्थैतिक अवस्था में लाभ 0, गतिशील परिवर्तन (5 प्रकार) अधिशेष लाभ उत्पन्न करते हैं।
23. मिखाइल कालेकी (Michal Kalecki) 1954
📖 परिचय
पोलिश अर्थशास्त्री, कीन्स से स्वतंत्र रूप से प्रभावी मांग का सिद्धांत विकसित किया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Theory of Economic Dynamics" (1954)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- एकाधिकार की डिग्री (Degree of Monopoly): $\mu = \frac{P - MC}{P}$
- लाभ का हिस्सा (Profit share) = $\frac{\mu}{1+\mu}$, मजदूरी का हिस्सा = $\frac{1}{1+\mu}$
- लाभ = निवेश + सरकारी घाटा + निर्यात अधिशेष (पूंजीपतियों की बचत = निवेश)
- प्रसिद्ध सूत्र: "पूंजीपति जो कमाते हैं, वह खर्च करते हैं; मजदूर जो खर्च करते हैं, वह कमाते हैं"
✅ एक-पंक्ति संशोधन
कालेकी = लाभ एकाधिकार शक्ति से, μ = (P-MC)/P, लाभ हिस्सा = μ/(1+μ), "Capitalists earn what they spend"
24. कार्ल मार्क्स (Karl Marx) 1867
📖 परिचय
जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री – आधुनिक समाजवाद और साम्यवाद के सिद्धांतकार।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Das Kapital" (Capital: A Critique of Political Economy) – खंड 1 (1867)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- श्रम मूल्य सिद्धांत (LTV): मूल्य = $c + v + s$ (c=स्थिर पूंजी, v=परिवर्तनशील पूंजी, s=अधिशेष मूल्य)
- अधिशेष मूल्य दर (Rate of Surplus Value) = s/v (शोषण दर)
- लाभ दर (Rate of Profit) = s/(c+v)
- लाभ की दर में गिरावट का नियम: $r = \frac{s'}{1 + c/v}$ – जैसे c/v बढ़ता है, r घटता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
मार्क्स = लाभ अधिशेष मूल्य (s), मजदूरों के अवैतनिक श्रम से, लाभ दर s/(c+v), गिरती लाभ दर का नियम।
25. विल्फ्रेडो पेरेटो (Vilfredo Pareto) 1906
📖 परिचय
इतालवी अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, लॉज़ेन स्कूल के प्रमुख।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Manual of Political Economy" (1906)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- पेरेटो दक्षता (Pareto Efficiency): कोई भी व्यक्ति बिना दूसरे को बदतर किए बेहतर नहीं हो सकता
- प्रथम कल्याण प्रमेय: प्रतिस्पर्धी संतुलन पेरेटो दक्ष होता है
- द्वितीय कल्याण प्रमेय: किसी भी पेरेटो दक्ष बिंदु को पुनर्वितरण (lump-sum transfers) द्वारा प्रतिस्पर्धी संतुलन के रूप में प्राप्त किया जा सकता है
- पेरेटो सिद्धांत (Pareto Principle): यदि कम से कम एक बेहतर और कोई बदतर नहीं, तो सामाजिक रूप से बेहतर
✅ एक-पंक्ति संशोधन
पेरेटो = दक्षता (कोई बेहतर नहीं कर सकता), पहला प्रमेय (बाजार दक्ष), दूसरा (पुनर्वितरण से कुछ भी दक्ष) – न्याय से कोई सरोकार नहीं।
26. निकोलस काल्डोर (Nicholas Kaldor) 1939
📖 परिचय
हंगेरियन मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री, कीन्स के सहयोगी, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
📚 प्रमुख लेख
"Welfare Propositions in Economics and Interpersonal Comparisons of Utility" – Economic Journal (1939)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- काल्डोर-हिक्स मानदंड: एक नीति सामाजिक कल्याण में सुधार करती है यदि लाभान्वित होने वाले लोग सैद्धांतिक रूप से हानि उठाने वालों को क्षतिपूर्ति कर सकें (भले ही वास्तविक भुगतान न हो)
- यह लागत-लाभ विश्लेषण का आधार है: यदि कुल लाभ > कुल हानि, तो परियोजना स्वीकार्य
- क्षतिपूर्ति संभावित (potential) है, वास्तविक नहीं
✅ एक-पंक्ति संशोधन
काल्डोर-हिक्स = यदि लाभान्वित हानि उठाने वालों को सैद्धांतिक रूप से भरपाई कर सकें (चाहे भरपाई हो या न हो) तो नीति बेहतर – लागत-लाभ विश्लेषण का आधार।
27. जॉन हिक्स (John Hicks) – कल्याण 1939
📖 परिचय
ब्रिटिश अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1972) – कल्याण अर्थशास्त्र और सामान्य संतुलन में योगदान।
📚 प्रमुख लेख
"The Foundations of Welfare Economics" – Economic Journal (1939)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- काल्डोर-हिक्स मानदंड (समान विचार, भिन्न दृष्टिकोण)
- क्षतिपूर्ति भिन्नता (Compensating Variation – CV): कीमत परिवर्तन के बाद उपभोक्ता को पुरानी उपयोगिता पर रखने के लिए आय में बदलाव
- समतुल्य भिन्नता (Equivalent Variation – EV): कीमत परिवर्तन से पहले उपभोक्ता को नई उपयोगिता देने के लिए आय में बदलाव
✅ एक-पंक्ति संशोधन
हिक्स (कल्याण) = CV और EV (क्षतिपूर्ति और समतुल्य भिन्नता), काल्डोर-हिक्स मानदंड, हिक्स मानदंड (हारने वालों का दृष्टिकोण)।
28. टिबोर सीतोव्स्की (Tibor Scitovsky) 1941
📖 परिचय
हंगेरियन मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
📚 प्रमुख लेख
"A Note on Welfare Propositions in Economics" – Review of Economic Studies (1941)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- सीतोव्स्की विरोधाभास (Scitovsky Paradox): काल्डोर-हिक्स मानदंड से A > B और B > A दोनों सत्य हो सकते हैं (साइकिल)
- सीतोव्स्की दोहरा मानदंड: परिवर्तन कल्याणकारी है यदि और केवल यदि (i) काल्डोर मानदंड संतुष्ट हो और (ii) हिक्स मानदंड भी संतुष्ट हो
- दोनों दिशाओं में जाँच – विरोधाभास से बचाव
✅ एक-पंक्ति संशोधन
सीतोव्स्की = काल्डोर-हिक्स साइकिल बना सकता है; समाधान – दोहरा मानदंड (आगे और पीछे दोनों जाँचें)।
29. अब्राम बर्गसन (Abram Bergson) 1938
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। सामाजिक कल्याण फलन के औपचारिक जनक।
📚 प्रमुख लेख
"A Reformulation of Certain Aspects of Welfare Economics" – Quarterly Journal of Economics (1938)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- SWF: $W = F(U_1, U_2, ..., U_n)$
- यह व्यक्तिगत उपयोगिताओं को सामाजिक कल्याण में परिवर्तित करता है
- SWF समाज के नैतिक मूल्यों (समानता, दक्षता, स्वतंत्रता) को दर्शाता है
- पेरेटो दक्षता SWF का एक विशेष मामला है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
बर्गसन-सैमुएलसन SWF = W = F(U₁,...,Uₙ) – सामाजिक कल्याण व्यक्तिगत उपयोगिताओं का एक समग्र कार्य।
30. पॉल सैमुएलसन (Paul Samuelson) – SWF 1947
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1970)। बर्गसन के SWF को गणितीय दृढ़ता दी।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Foundations of Economic Analysis" (1947)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- सामाजिक उदासीनता वक्र (Social Indifference Curves) – SWF से व्युत्पन्न
- सार्वजनिक वस्तुओं के लिए सैमुएलसन शर्त: $\sum_i MRS^i_{x,g} = MRT_{x,g}$
- यह बताती है कि सार्वजनिक वस्तु का इष्टतम प्रावधान तब होता है जब सभी व्यक्तियों की सीमांत प्रतिस्थापन दरों का योग = सीमांत परिवर्तन दर
✅ एक-पंक्ति संशोधन
सैमुएलसन (SWF) = Σ MRS = MRT (सार्वजनिक वस्तुओं के लिए), सामाजिक उदासीनता वक्र, बर्गसन-सैमुएलसन SWF।
31. जेरेमी बेंथम (Jeremy Bentham) 1789
📖 परिचय
अंग्रेजी दार्शनिक, न्यायशास्त्री, उपयोगितावाद (Utilitarianism) के संस्थापक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"An Introduction to the Principles of Morals and Legislation" (1789)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- बेंथमाइट SWF: $W = \sum U_i$ (योगात्मक)
- अधिकतम सुख का सिद्धांत: "अधिकतम संख्या में अधिकतम सुख"
- अंतर्वैयक्तिक उपयोगिता तुलना को मान्यता देता है
- वितरण तटस्थ (distribution neutral) – केवल योग मायने रखता है, वितरण नहीं
✅ एक-पंक्ति संशोधन
बेंथम = उपयोगितावादी SWF (W = ΣUᵢ) – कुल उपयोगिता अधिकतम करो, चाहे वितरण कुछ भी हो।
32. जॉन रॉल्स (John Rawls) 1971
📖 परिचय
अमेरिकी दार्शनिक, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, "A Theory of Justice" के लेखक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"A Theory of Justice" (1971)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- रॉल्सियन SWF (मैक्सिमिन): $W = \min(U_1, U_2, ..., U_n)$
- अज्ञानता का पर्दा (Veil of Ignorance): कोई नहीं जानता कि समाज में उसकी स्थिति क्या होगी → तर्कसंगत व्यक्ति सबसे बुरी स्थिति (मैक्सिमिन) का चयन करेगा
- अंतर सिद्धांत (Difference Principle): असमानता तभी स्वीकार्य जब वह सबसे गरीब को लाभ पहुँचाए
✅ एक-पंक्ति संशोधन
रॉल्स = मैक्सिमिन (W = min Uᵢ), अज्ञानता का पर्दा, अंतर सिद्धांत – केवल सबसे गरीब पर ध्यान।
33. फ्रेडरिक नीत्शे (Friedrich Nietzsche) 1883-85
📖 परिचय
जर्मन दार्शनिक, अस्तित्ववाद के अग्रदूत, "परम-मानव" (Übermensch) और "शक्ति की इच्छा" के प्रवर्तक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Thus Spoke Zarathustra" (1883-85), "Beyond Good and Evil" (1886)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- नीत्शेवादी SWF (अधिकतम): $W = \max(U_1, U_2, ..., U_n)$
- समाज केवल अपने सबसे उत्कृष्ट सदस्यों के माध्यम से आगे बढ़ता है
- असमानता न केवल स्वीकार्य, बल्कि वांछनीय है
- यह पेरेटो सिद्धांत का उल्लंघन करता है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
नीत्शे = अधिकतम (max W = max Uᵢ) – अभिजात्य दृष्टिकोण, परम-मानव का विकास, एरो की गैर-तानाशाही शर्त का उल्लंघन।
34. केनेथ एरो (Kenneth Arrow) 1951
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1972), सामाजिक विकल्प सिद्धांत के जनक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Social Choice and Individual Values" (1951)
🎯 मुख्य शर्तें (पाँच)
- U (असीमित डोमेन): सभी तार्किक प्राथमिकताएँ अनुमत
- P (पेरेटो सिद्धांत): सर्वसम्मति का सम्मान
- I (IIA): अप्रासंगिक विकल्पों से स्वतंत्रता
- D (गैर-तानाशाही): कोई एक व्यक्ति तानाशाह नहीं
- R (सकर्मकता): सामाजिक प्राथमिकताएँ सकर्मक
📌 मुख्य निष्कर्ष
- असंभवता प्रमेय: कम से कम 3 विकल्पों और 2 व्यक्तियों के लिए कोई भी सामाजिक कल्याण फलन एक साथ सभी पाँच शर्तों को संतुष्ट नहीं कर सकता
- तानाशाही ही एकमात्र समाधान है (लेकिन D शर्त का उल्लंघन)
- यदि प्राथमिकताएँ एकल-शिखर (single-peaked) हों, तो बहुमत नियम सकर्मक हो सकता है (ब्लैक का प्रमेय)
✅ एक-पंक्ति संशोधन
एरो = कोई भी सही लोकतांत्रिक मतदान प्रणाली संभव नहीं; पाँच शर्तें (UPID R) एक साथ संतुष्ट नहीं हो सकतीं।
35. जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann) 1944
📖 परिचय
हंगेरियन-अमेरिकी गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, कंप्यूटर वैज्ञानिक – 20वीं सदी के महानतम बुद्धिजीवियों में से एक।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Theory of Games and Economic Behavior" (1944 – मॉर्गनस्टर्न के साथ)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- मिनिमैक्स प्रमेय: दो-व्यक्ति शून्य-योग खेल में एक मूल्य V मौजूद होता है: $\max_{p} \min_{q} u(p,q) = \min_{q} \max_{p} u(p,q) = V$
- मिश्रित रणनीतियों (mixed strategies) के साथ संतुलन
- विस्तारित रूप (extensive form) और सामान्य रूप (normal form) का विकास
- सहकारी गेम थ्योरी में गठबंधन का विश्लेषण
✅ एक-पंक्ति संशोधन
वॉन न्यूमैन = मिनिमैक्स प्रमेय (दो-व्यक्ति शून्य-योग खेल), मिश्रित रणनीतियाँ, गेम थ्योरी के जनक।
36. ऑस्कर मॉर्गनस्टर्न (Oskar Morgenstern) 1944
📖 परिचय
जर्मन-अमेरिकी अर्थशास्त्री, प्रिंसटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, वॉन न्यूमैन के सहयोगी।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Theory of Games and Economic Behavior" (1944 – वॉन न्यूमैन के साथ)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- अर्थशास्त्र परस्पर निर्भर निर्णयों (interdependent decisions) का खेल है
- वॉन न्यूमैन-मॉर्गनस्टर्न उपयोगिता प्रमेय: तर्कसंगत व्यक्ति की प्राथमिकताएँ अपेक्षित उपयोगिता द्वारा निरूपित की जा सकती हैं
- पूर्ण प्रतिस्पर्धा गेम थ्योरी का एक विशेष मामला है
- सहकारी और गैर-सहकारी खेलों का अंतर स्पष्ट किया
✅ एक-पंक्ति संशोधन
मॉर्गनस्टर्न = वॉन न्यूमैन के साथ गेम थ्योरी के संस्थापक; वी.एन.-एम. उपयोगिता प्रमेय; अर्थशास्त्र को खेल के रूप में देखा।
37. जॉन नैश (John Nash) 1950
📖 परिचय
अमेरिकी गणितज्ञ, नोबेल पुरस्कार (1994), "ए ब्यूटीफुल माइंड" के विषय।
📚 प्रमुख लेख/थीसिस
"Equilibrium Points in N-Person Games" – PNAS (1950), PhD थीसिस "Non-Cooperative Games" (1950)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- नैश संतुलन: रणनीतियों का एक प्रोफाइल $(s_1^*, ..., s_n^*)$ जहाँ कोई भी खिलाड़ी एकतरफा विचलन से लाभ नहीं उठा सकता: $u_i(s_i^*, s_{-i}^*) \ge u_i(s_i, s_{-i}^*) \ \forall i, \forall s_i$
- अस्तित्व प्रमेय: प्रत्येक सीमित खेल (finite game) में कम से कम एक नैश संतुलन होता है (शुद्ध या मिश्रित में)
- मिनिमैक्स प्रमेय का सामान्यीकरण – शून्य-योग से गैर-शून्य-योग तक
✅ एक-पंक्ति संशोधन
नैश = नैश संतुलन (कोई एकतरफा विचलन लाभदायक नहीं), अस्तित्व प्रमेय (हर सीमित खेल में NE होता है)।
38. जॉन मेनार्ड स्मिथ (John Maynard Smith) 1982
📖 परिचय
ब्रिटिश सैद्धांतिक जीवविज्ञानी, विकासवादी जीवविज्ञानी। गेम थ्योरी को जीवविज्ञान में लागू किया।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Evolution and the Theory of Games" (1982)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- ESS की परिभाषा: एक रणनीति $s^*$ ESS है यदि (i) $(s^*, s^*)$ एक नैश संतुलन है, और (ii) यदि $u(s^*, s^*) = u(s, s^*)$ तो $u(s^*, s) > u(s, s)$
- हर ESS एक नैश संतुलन है, लेकिन विपरीत आवश्यक नहीं
- प्राकृतिक चयन द्वारा स्थिर रणनीतियाँ
- हॉक-डव (Hawk-Dove) खेल – क्लासिक उदाहरण
✅ एक-पंक्ति संशोधन
मेनार्ड स्मिथ = ESS – विकासात्मक स्थिर रणनीति (उत्परिवर्तियों के आक्रमण को प्रतिरोधित करती है), हर ESS नैश संतुलन है।
39. रॉबर्ट एक्सेलरोड (Robert Axelrod) 1984
📖 परिचय
अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक, मिशिगन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। सहयोग के विकास (Evolution of Cooperation) के लिए प्रसिद्ध।
📚 प्रमुख पुस्तक
"The Evolution of Cooperation" (1984)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- टिट-फॉर-टैट रणनीति: पहली चाल में सहयोग (Cooperate); उसके बाद, पिछली चाल में प्रतिद्वंद्वी ने जो किया, वही करो
- चार गुण: दयालु (nice), प्रतिशोधी (retaliatory), क्षमाशील (forgiving), स्पष्ट (clear)
- पुनरावृत्ति (repetition) सहयोग को सक्षम बनाती है – "भविष्य की छाया" (shadow of the future)
- कंप्यूटर टूर्नामेंट में सबसे सफल रणनीति
✅ एक-पंक्ति संशोधन
एक्सेलरोड = पुनरावृत्त कैदी की दुविधा में टिट-फॉर-टैट सबसे सफल; सहयोग तब विकसित होता है जब खेल लंबे समय तक चलता है।
40. पॉल मिलग्रोम (Paul Milgrom) 1990s-2000s
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (2020 – रॉबर्ट विल्सन के साथ), स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
📚 प्रमुख पुस्तक
"Putting Auction Theory to Work" (2004)
📌 मुख्य निष्कर्ष
- विजेता का अभिशाप (Winner's Curse): सामान्य मूल्य नीलामी में विजेता अधिक भुगतान कर देता है
- सिमेंस मल्टीपल-राउंड नीलामी (SMRA): FCC स्पेक्ट्रम नीलामी का डिज़ाइन
- लिंकिंग प्रिंसिपल (Linkage Principle): अपेक्षित राजस्व बढ़ाने के लिए नीलामीकर्ता को अधिक जानकारी प्रकट करनी चाहिए
- द्वितीय-मूल्य नीलामी (Vickrey auction) में सत्यनिष्ठ बोली (truthful bidding) एक प्रभावी रणनीति है
✅ एक-पंक्ति संशोधन
मिलग्रोम = नीलामी सिद्धांत, विजेता का अभिशाप, स्पेक्ट्रम नीलामी (SMRA), लिंकिंग प्रिंसिपल, द्वितीय-मूल्य नीलामी में सत्यनिष्ठ बोली।
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