11Labour Economics
👷 श्रम अर्थशास्त्र (Labour Economics) के 4 स्तंभ – दोहरा श्रम बाजार, दक्षता मजदूरी, नौकरी बाजार संकेत
✔ पूर्ण प्रारूप: परिचय · सिद्धांत · पुस्तक/वर्ष · मान्यताएँ · निष्कर्ष · आगे बढ़ाने वाले · आलोचना · परीक्षा तथ्य · अतिरिक्त तथ्य · सूत्र · न्यूमेरिकल · MCQ · एक-पंक्ति संशोधन — कोई भी शब्द नहीं हटाया गया।
1. डोरिंगर और पियोरे (Doeringer & Piore) – 1971
दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market Theory)
📖 परिचय
पीटर डोरिंगर (Peter Doeringer) – अमेरिकी अर्थशास्त्री, बोस्टन विश्वविद्यालय; माइकल पियोरे (Michael Piore) – अमेरिकी अर्थशास्त्री, MIT। दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market Theory – DLMT) के प्रतिपादक।🎯 सिद्धांत
दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market Theory) – श्रम बाजार दो खंडों (segments) में विभाजित होता है: प्राथमिक (Primary) और द्वितीयक (Secondary)।📚 पुस्तक/वर्ष
"Internal Labor Markets and Manpower Analysis" (1971)।⚙️ मुख्य मान्यताएँ (Assumptions)
- श्रम बाजार एक समान (homogeneous) नहीं है – यह दो अलग-अलग खंडों (segments) में विभाजित है जिनके बीच गतिशीलता (mobility) सीमित है।
- प्राथमिक श्रम बाजार (Primary Labour Market): उच्च मजदूरी (high wages), नौकरी की सुरक्षा (job security), अच्छी कार्य स्थितियाँ (good working conditions), उन्नति के अवसर (promotion opportunities), आंतरिक श्रम बाजार (internal labour market) – फर्मों के भीतर नियम और प्रक्रियाएँ (पदानुक्रम, वरिष्ठता नियम, आंतरिक प्रशिक्षण), संस्थागत नियम (institutional rules) – संघ (unions), श्रम कानून (labour laws)।
- द्वितीयक श्रम बाजार (Secondary Labour Market): कम मजदूरी (low wages), नौकरी की असुरक्षा (job insecurity), खराब कार्य स्थितियाँ (poor working conditions), उन्नति के अवसर नहीं (no promotion prospects), बाहरी श्रम बाजार (external labour market) – प्रतिस्पर्धी, स्पॉट बाजार (spot market) जैसा, उच्च कारोबार (high turnover), अप्रशिक्षित श्रम (unskilled labour)।
- प्राथमिक और द्वितीयक बाजारों के बीच गतिशीलता (mobility) बहुत सीमित है – द्वितीयक बाजार के श्रमिक बहुत कठिनाई से प्राथमिक बाजार में प्रवेश कर सकते हैं।
- द्वितीयक बाजार मानव पूंजी (human capital) को बढ़ाने के अवसर प्रदान नहीं करता – इसलिए श्रमिक वहीं फँसे रहते हैं।
- विभाजन (segmentation) का कारण संस्थागत कारक (institutional factors) हैं – नस्ल, लिंग, जाति, सामाजिक नेटवर्क, और ऐतिहासिक भेदभाव।
🔍 मुख्य निष्कर्ष (Conclusions)
- प्राथमिक बाजार: उच्च मजदूरी, नौकरी सुरक्षा, उन्नति के अवसर, आंतरिक प्रशिक्षण, कम कारोबार।
- द्वितीयक बाजार: निम्न मजदूरी, असुरक्षा, मृत-अंत (dead-end) नौकरियाँ, उच्च कारोबार, कोई प्रशिक्षण नहीं।
- आंतरिक श्रम बाजार (Internal Labour Market – ILM): फर्मों के भीतर नियमों और प्रक्रियाओं का एक समूह जो श्रम का आवंटन (allocation) और मूल्य निर्धारण (pricing) करता है – यह विशुद्ध प्रतिस्पर्धी (pure competitive) बाजार से भिन्न होता है।
- प्राथमिक बाजार का एकाधिकार (Monopoly) जैसा व्यवहार: संघ (unions) और संस्थागत सुरक्षा के कारण, मजदूरी प्रतिस्पर्धी स्तर (competitive level) से ऊपर होती है।
- द्वितीयक बाजार प्रतिस्पर्धी (competitive) है: यहाँ मजदूरी पूर्ण प्रतिस्पर्धा के करीब होती है, लेकिन कार्य स्थितियाँ खराब होती हैं।
- गतिशीलता की कमी (Lack of mobility) का कारण: द्वितीयक बाजार के श्रमिकों के पास प्राथमिक बाजार में प्रवेश के लिए आवश्यक कौशल (skills), कनेक्शन (connections), या संकेत (signals) नहीं होते।
- नीति निहितार्थ: शिक्षा और प्रशिक्षण (education and training) अकेले पर्याप्त नहीं हैं – प्राथमिक बाजार तक पहुँच के लिए सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) और संस्थागत सुधार (institutional reforms) की आवश्यकता है।
🚀 आगे बढ़ाने वाले
गैरी बेकर (Becker – Human Capital Theory – चुनौती), लेस्टर थुरो (Thurow – Job Competition Model), डेविड गॉर्डन, रिचर्ड एडवर्ड्स, माइकल रीच (Segmented Labour Markets)।⚠️ आलोचना (Criticism)
मानव पूंजी सिद्धांतकार (Becker, Mincer): शिक्षा और प्रशिक्षण के महत्व को कम करके आंकते हैं; नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्री: विभाजन केवल अस्थायी (temporary) है; अनुभवजन्य साक्ष्य मिश्रित (कुछ अध्ययनों में गतिशीलता पाई गई); द्वितीयक बाजार की परिभाषा अस्पष्ट; वैश्वीकरण (Globalisation) का प्रभाव (प्राथमिक बाजार सिकुड़ रहा है)।📌 परीक्षा तथ्य (Exam Points)
- PYQ: दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market Theory) के प्रतिपादक – डोरिंगर और पियोरे (Doeringer & Piore, 1971)।
- PYQ: दो खंड (segments) – प्राथमिक (Primary) और द्वितीयक (Secondary)।
- PYQ: प्राथमिक बाजार की मुख्य विशेषताएँ – उच्च मजदूरी, नौकरी सुरक्षा, उन्नति के अवसर, आंतरिक प्रशिक्षण, कम कारोबार।
- ट्रिक: "Doeringer & Piore = D & P for 'Dual & Primary/secondary' – 'P' also for 'Piore's primary market'"
🧮 Numerical Question (Conceptual)
A: सॉफ्टवेयर इंजीनियर (₹1,50,000/माह, बीमा, पेंशन, प्रशिक्षण) – प्राथमिक बाजार; B: दैनिक मजदूर (₹400/दिन, असुरक्षित) – द्वितीयक बाजार; गतिशीलता (mobility) बहुत कठिन।❓ MCQ
द्वितीयक श्रम बाजार (Secondary Labour Market) की विशेषता: (c) उच्च कारोबार (high turnover)🔄 एक-पंक्ति संशोधन
Doeringer & Piore: दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत – प्राथमिक बाजार (उच्च मजदूरी, सुरक्षा, उन्नति) और द्वितीयक बाजार (निम्न मजदूरी, असुरक्षा, मृत-अंत); बीच में सीमित गतिशीलता; आंतरिक श्रम बाजार (ILM) प्राथमिक की विशेषता।2. जोसेफ स्टिग्लिट्ज (Joseph Stiglitz) & 3. जेनेट येलेन (Janet Yellen) – 1980s
दक्षता मजदूरी सिद्धांत (Efficiency Wage Theory)
📖 परिचय
जोसेफ स्टिग्लिट्ज (अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल 2001, कोलंबिया विश्वविद्यालय) और जेनेट येलेन (अमेरिकी अर्थशास्त्री, फेडरल रिजर्व की पूर्व अध्यक्ष, ट्रेजरी सचिव) – दंपति (married couple) ने मिलकर दक्षता मजदूरी (efficiency wage) पर कई महत्वपूर्ण पेपर लिखे।🎯 सिद्धांत
दक्षता मजदूरी सिद्धांत (Efficiency Wage Theory) – फर्में प्रतिस्पर्धी स्तर से अधिक मजदूरी (above-market wage) क्यों देती हैं।📚 पुस्तकें / लेख
स्टिग्लिट्ज: "The Efficiency Wage Hypothesis, Surplus Labour, and the Distribution of Income in LDCs" (1976 – प्रारंभिक); येलेन: "Efficiency Wage Models of Unemployment" – American Economic Review (1984); स्टिग्लिट्ज और येलेन: "Efficiency Wages and the Macroeconomic Cycle" (1980s)।⚙️ मुख्य मान्यताएँ (Assumptions)
- श्रमिकों का प्रयास (effort) मजदूरी (wage) पर निर्भर करता है – उच्च मजदूरी से श्रमिक अधिक मेहनत करते हैं (या कम शिरकत – shirking – करते हैं)।
- फर्में श्रमिकों के प्रयास (effort) को पूरी तरह से निःशुल्क (costlessly) नहीं माप सकतीं – निगरानी (monitoring) महंगी है या अधूरी है।
- यदि एक फर्म प्रतिस्पर्धी (market-clearing) मजदूरी देती है, तो श्रमिकों के पास शिरकत (shirking) करने का प्रोत्साहन होता है – क्योंकि यदि उन्हें निकाल दिया जाता है, तो वे तुरंत समान मजदूरी पर दूसरी नौकरी पा सकते हैं।
- यदि एक फर्म प्रतिस्पर्धी स्तर से अधिक मजदूरी (efficiency wage) देती है, तो: श्रमिक शिरकत (shirking) नहीं करेंगे (नौकरी खोने पर "किराया" खोना पड़ता है); कारोबार (turnover) कम होता है; बेहतर श्रमिक (better workers) आकर्षित होते हैं; मनोबल (morale) और वफादारी (loyalty) बढ़ती है।
- फर्में एक ऐसी मजदूरी (w*) चुनती हैं जो प्रति मजदूरी लागत पर प्रयास (effort per wage cost) को अधिकतम करती है – यही दक्षता मजदूरी (efficiency wage) है।
🔍 मुख्य निष्कर्ष (Conclusions)
- दक्षता मजदूरी के चार मुख्य मॉडल: (i) शिरकत मॉडल (Shirking Model – Shapiro & Stiglitz): निगरानी महंगी, उच्च मजदूरी शिरकत को हतोत्साहित करती है; (ii) कारोबार मॉडल (Turnover Model – Stiglitz, Yellen): उच्च मजदूरी कारोबार घटाती है – भर्ती और प्रशिक्षण लागत बचाती है; (iii) प्रतिकूल चयन मॉडल (Adverse Selection Model – Weiss): उच्च मजदूरी अधिक उत्पादक श्रमिकों को आकर्षित करती है; (iv) पोषण मॉडल (Nutrition Model – Leibenstein): उच्च मजदूरी बेहतर पोषण देती है, उत्पादकता बढ़ाती है (विकासशील देशों में)।
- शापिरो-स्टिग्लिट्ज मॉडल (Shapiro-Stiglitz Model – 1984) का मुख्य परिणाम: बेरोजगारी (unemployment) एक अनुशासनात्मक उपकरण (disciplinary device) के रूप में कार्य करती है; अनैच्छिक बेरोजगारी (involuntary unemployment) उत्पन्न होती है।
- दक्षता मजदूरी (efficiency wage) प्रतिस्पर्धी (market-clearing) मजदूरी से अधिक होती है: w_E > w^*; यह बेरोजगारी पैदा कर सकती है।
- दक्षता मजदूरी मॉडल में अनैच्छिक बेरोजगारी (involuntary unemployment) मौजूद हो सकती है – श्रमिक प्रतिस्पर्धी मजदूरी पर काम करने को तैयार हैं, लेकिन फर्में उन्हें काम पर नहीं रखतीं।
🚀 आगे बढ़ाने वाले
कार्ल शापिरो (Shapiro – shirking model), एंड्रयू वाइस (Weiss – adverse selection), हार्वे लीबेनस्टीन (Leibenstein – nutrition model), जेरेमी बुलो और लॉरेंस समर्स (Bulow & Summers – dual labour markets with efficiency wages)।⚠️ आलोचना (Criticism)
प्रयोगात्मक साक्ष्य (Experimental evidence) मिश्रित हैं; अन्य स्पष्टीकरण (संघ दबाव, सामाजिक मानदंड, न्याय की भावना); प्रयास (effort) को मापना कठिन; दीर्घकालिक अनुबंध (long-term contracts) को नजरअंदाज करता है; एजेंसी सिद्धांत (incentive contracts) से तुलना में केवल मजदूरी पर ध्यान।📌 परीक्षा तथ्य (Exam Points)
- PYQ: दक्षता मजदूरी सिद्धांत (Efficiency Wage Theory) के प्रमुख प्रतिपादक – जोसेफ स्टिग्लिट्ज, जेनेट येलेन, कार्ल शापिरो, एंड्रयू वाइस।
- PYQ: दक्षता मजदूरी (efficiency wage) > प्रतिस्पर्धी मजदूरी (competitive wage) – यह शिरकत को रोकती है, उत्पादकता बढ़ाती है।
- PYQ: शापिरो-स्टिग्लिट्ज मॉडल (Shapiro-Stiglitz Model) में बेरोजगारी एक अनुशासनात्मक उपकरण (disciplinary device) है – यह श्रमिकों को शिरकत (shirking) से रोकती है।
- ट्रिक: "Stiglitz-Yellen = S & Y for 'Shapiro-Stiglitz (shirking) and Yellen (turnover/efficiency)' – 'E' for 'Efficiency wage > market wage'"
📐 सूत्र (Formulas)
प्रयास फलन (Effort function): E = e(w), e'(w) > 0; फर्म का लाभ अधिकतमीकरण: max w [ e(w) * p - w ] ⇒ शर्त: e'(w) * p = 1 ⇒ w_E ऐसा कि प्रति मजदूरी लागत पर प्रयास अधिकतम हो।🧮 Numerical Question (Efficiency Wage vs Market Wage)
प्रतिस्पर्धी मजदूरी w*=500, प्रयास E = min(100, 0.5×w), लाभ = (E×100) – w। w=500 पर E=100, लाभ=9500; w=200 पर E=100, लाभ=9800 (अधिकतम) ⇒ w_E=200।❓ MCQ
शापिरो-स्टिग्लिट्ज मॉडल में अनैच्छिक बेरोजगारी का मुख्य कारण: (c) फर्मों द्वारा प्रतिस्पर्धी स्तर से अधिक मजदूरी (efficiency wage) का भुगतान🔄 एक-पंक्ति संशोधन
Stiglitz & Yellen: दक्षता मजदूरी सिद्धांत – फर्में प्रतिस्पर्धी मजदूरी से अधिक भुगतान करती हैं ताकि श्रमिक शिरकत (shirking) न करें, कारोबार (turnover) कम हो, और बेहतर श्रमिक आकर्षित हों; इससे अनैच्छिक बेरोजगारी (involuntary unemployment) उत्पन्न होती है (बेरोजगारी अनुशासनात्मक उपकरण है)।4. माइकल स्पेंस (Michael Spence) – 1973
नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling)
📖 परिचय
अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (2001 – एकर्लोफ, स्पेंस, स्टिग्लिट्ज के साथ)। नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling) के जनक।🎯 सिद्धांत
नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling Model) – शिक्षा (education) एक उत्पादकता-बढ़ाने वाला निवेश (human capital) होने के बजाय एक संकेत (signal) है जो श्रमिकों की अंतर्निहित उत्पादकता (underlying productivity) को प्रकट (reveal) करता है।📚 पुस्तक / लेख
"Job Market Signaling" – Quarterly Journal of Economics (1973)।⚙️ मुख्य मान्यताएँ (Assumptions)
- श्रम बाजार में असममित जानकारी (asymmetric information) होती है: नियोक्ता (employer) श्रमिकों की वास्तविक उत्पादकता (true productivity) नहीं जानते – श्रमिक खुद जानते हैं।
- श्रमिक दो प्रकार (types) के होते हैं: उच्च उत्पादकता (high-ability / high-productivity) और निम्न उत्पादकता (low-ability / low-productivity)।
- शिक्षा (education) के दो प्रभाव हो सकते हैं: मानव पूंजी प्रभाव (Human capital effect – उत्पादकता बढ़ाती है) और संकेत प्रभाव (Signalling effect – उत्पादकता नहीं बढ़ाती, केवल प्रकार के बारे में संकेत देती है)।
- संकेत (signal) केवल तभी प्रभावी (effective) होता है जब उच्च-उत्पादकता श्रमिकों के लिए संकेत देने की लागत (cost of signalling) निम्न-उत्पादकता श्रमिकों की तुलना में कम हो।
- नियोक्ता शिक्षा के स्तर (level of education) को देखकर श्रमिकों की उत्पादकता का अनुमान (infer) लगाते हैं – और उसी के अनुसार मजदूरी (wage) देते हैं।
🔍 मुख्य निष्कर्ष (Conclusions)
- पृथक्करण संतुलन (Separating equilibrium): उच्च-क्षमता श्रमिक e* या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त करते हैं, निम्न-क्षमता श्रमिक e* से कम शिक्षा प्राप्त करते हैं – नियोक्ता इसके आधार पर अलग-अलग मजदूरी (w_H > w_L) देते हैं।
- पूलिंग संतुलन (Pooling equilibrium): सभी श्रमिक समान शिक्षा स्तर चुनते हैं, नियोक्ता औसत उत्पादकता के अनुसार समान मजदूरी देते हैं।
- शिक्षा का संकेत मूल्य (Signalling value of education): शिक्षा उत्पादकता नहीं बढ़ा सकती है, फिर भी इसका मूल्य हो सकता है – क्योंकि यह श्रमिक के प्रकार (type) के बारे में जानकारी प्रकट (reveal) करती है।
- स्पेंस मॉडल बनाम मानव पूंजी मॉडल (Becker): बेकर में शिक्षा उत्पादकता बढ़ाती है (मानव पूंजी); स्पेंस में शिक्षा उत्पादकता नहीं बढ़ाती, केवल संकेत देती है (signalling)।
- यदि शिक्षा केवल एक संकेत (signal) है, तो शिक्षा पर सरकारी सब्सिडी (government subsidy) न्यायोचित नहीं हो सकती – क्योंकि यह उत्पादकता नहीं बढ़ाती, केवल श्रमिकों को पुनर्वितरित करती है।
🚀 आगे बढ़ाने वाले
गैरी बेकर (Becker – Human Capital – चुनौती), जोसेफ स्टिग्लिट्ज (Stiglitz – screening), एंड्रयू वाइस (Weiss – empirical signalling), रिले (Riley – generalisation)।⚠️ आलोचना (Criticism)
मानव पूंजी सिद्धांतकार (Becker, Mincer): शिक्षा के उत्पादकता-बढ़ाने वाले प्रभाव को कम करके आंकते हैं; बहु-संकेत (multiple signals) की उपेक्षा; शिक्षा वास्तव में "लागत" है या "आनंद"? (यदि आनंद है तो मॉडल टूट जाता है); एकाधिक संतुलन (multiple equilibria) – भविष्यवाणी की कमी; नीति निहितार्थ विवादास्पद (शिक्षा सब्सिडी बंद करना अलोकप्रिय)।📌 परीक्षा तथ्य (Exam Points)
- PYQ: नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling Theory) – माइकल स्पेंस (Michael Spence, 1973)।
- PYQ: स्पेंस के संकेत मॉडल (Signalling Model) के अनुसार शिक्षा का मुख्य कार्य – श्रमिक की अंतर्निहित उत्पादकता (underlying productivity) के बारे में एक संकेत (signal) देना (उत्पादकता बढ़ाना नहीं)।
- PYQ: स्पेंस मॉडल और बेकर मॉडल में अंतर – बेकर: शिक्षा उत्पादकता बढ़ाती है (मानव पूंजी); स्पेंस: शिक्षा उत्पादकता नहीं बढ़ाती, केवल संकेत देती है (signalling)।
- ट्रिक: "Spence = S for 'Signalling' – 'S' also for 'Separating equilibrium'"
📐 सूत्र (Formulas)
पृथक्करण संतुलन के लिए शर्तें: (w_H - w_L)/c_L(e*) < 1 < (w_H - w_L)/c_H(e*); जहाँ c_H(e) < c_L(e) (उच्च-क्षमता के लिए संकेत देना सस्ता)।🧮 Numerical Question (Signalling Model)
w_H=200, w_L=100, c_H(e)=10e, c_L(e)=30e ⇒ प्रोत्साहन संगतता से e* ∈ [3.33, 10] उदाहरणार्थ e*=5 वर्ष।❓ MCQ
स्पेंस के संकेत मॉडल के अनुसार शिक्षा का कार्य: (b) श्रमिक की अंतर्निहित उत्पादकता (underlying productivity) के बारे में एक संकेत (signal) देना🔄 एक-पंक्ति संशोधन
Spence: नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling) – शिक्षा उत्पादकता नहीं बढ़ाती, बल्कि उच्च-क्षमता श्रमिकों का एक संकेत (signal) है (क्योंकि उनके लिए शिक्षा प्राप्त करना सस्ता है); पृथक्करण संतुलन (separating equilibrium) में, उच्च-क्षमता श्रमिक अधिक शिक्षा प्राप्त करते हैं और उच्च मजदूरी पाते हैं।📊 श्रम अर्थशास्त्र – 4 स्तंभ तुलना
| अर्थशास्त्री | मुख्य योगदान | प्रमुख अवधारणा | फोकस (Focus) | वर्ष |
|---|---|---|---|---|
| Doeringer & Piore | दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत | प्राथमिक (Primary) और द्वितीयक (Secondary) बाजार; सीमित गतिशीलता | श्रम बाजार विभाजन (Segmentation), संस्थागत कारक | 1971 |
| Stiglitz & Yellen | दक्षता मजदूरी सिद्धांत | दक्षता मजदूरी > प्रतिस्पर्धी मजदूरी; शिरकत (shirking), कारोबार (turnover), प्रतिकूल चयन (adverse selection) | अनैच्छिक बेरोजगारी (Involuntary unemployment), श्रमिक अनुशासन (worker discipline) | 1980s |
| Michael Spence | नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत | शिक्षा एक संकेत (signal) है, उत्पादकता-बढ़ाने वाला निवेश नहीं | असममित जानकारी (Asymmetric information), पृथक्करण संतुलन (Separating equilibrium) | 1973 |
📝 अतिरिक्त प्रश्न सेट (MCQ, Assertion-Reason, Match the Following, Numerical MCQs)
❓ अतिरिक्त MCQ
- Q1: 'आंतरिक श्रम बाजार' (Internal Labour Market) की अवधारणा किस सिद्धांत से संबंधित है?
(a) दक्षता मजदूरी (b) दोहरा श्रम बाजार (c) संकेत सिद्धांत (d) मानव पूंजी
उत्तर: (b) दोहरा श्रम बाजार - Q2: शापिरो-स्टिग्लिट्ज मॉडल (Shapiro-Stiglitz Model) दक्षता मजदूरी के किस मॉडल के अंतर्गत आता है?
(a) कारोबार मॉडल (b) प्रतिकूल चयन मॉडल (c) शिरकत मॉडल (d) पोषण मॉडल
उत्तर: (c) शिरकत मॉडल (Shirking Model) - Q3: स्पेंस के संकेत मॉडल (Signalling Model) में, पृथक्करण संतुलन (Separating equilibrium) के लिए क्या आवश्यक है?
(a) उच्च-क्षमता श्रमिकों के लिए संकेत देने की लागत निम्न-क्षमता से अधिक हो
(b) उच्च-क्षमता श्रमिकों के लिए संकेत देने की लागत निम्न-क्षमता से कम हो
(c) दोनों के लिए लागत समान हो
(d) संकेत देने की कोई लागत न हो
उत्तर: (b) उच्च-क्षमता श्रमिकों के लिए संकेत देने की लागत निम्न-क्षमता से कम हो
⚖️ Assertion-Reason Questions
- A: दोहरे श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market Theory) के अनुसार, प्राथमिक और द्वितीयक बाजारों के बीच गतिशीलता (mobility) सीमित होती है।
R: द्वितीयक बाजार के श्रमिकों के पास प्राथमिक बाजार में प्रवेश के लिए आवश्यक कौशल (skills), कनेक्शन (connections), या संकेत (signals) नहीं होते।
(a) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है
(b) A और R दोनों सही, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता
(c) A सही, R गलत
(d) A गलत, R सही
उत्तर: (a) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है - A: दक्षता मजदूरी (Efficiency Wage) हमेशा प्रतिस्पर्धी मजदूरी (market wage) से कम होती है।
R: दक्षता मजदूरी का उद्देश्य श्रमिकों को शिरकत (shirking) से रोकना है।
(a) A और R दोनों सही
(b) A और R दोनों गलत
(c) A गलत, R सही
(d) A सही, R गलत
उत्तर: (c) A गलत, R सही (दक्षता मजदूरी प्रतिस्पर्धी मजदूरी से अधिक होती है)
🔄 Match the Following
- स्तंभ A (सिद्धांत/अवधारणा) स्तंभ B (प्रतिपादक)
- 1. दोहरा श्रम बाजार सिद्धांत (Dual Labour Market) (a) स्टिग्लिट्ज और येलेन (Stiglitz & Yellen)
- 2. दक्षता मजदूरी सिद्धांत (Efficiency Wage) (b) माइकल स्पेंस (Michael Spence)
- 3. नौकरी बाजार संकेत सिद्धांत (Job Market Signalling) (c) डोरिंगर और पियोरे (Doeringer & Piore)
- 4. शिरकत मॉडल (Shirking Model) (d) शापिरो और स्टिग्लिट्ज (Shapiro & Stiglitz)
- उत्तर: 1-(c), 2-(a), 3-(b), 4-(d)
🧮 Numerical MCQs
- Q1 (Spence Model): एक श्रम बाजार में w_H=300, w_L=150, c_H(e)=15e, c_L(e)=45e। पृथक्करण संतुलन (separating equilibrium) के लिए e* की न्यूनतम और अधिकतम सीमा क्या है?
(a) 2.5 ≤ e* ≤ 5 (b) 3.33 ≤ e* ≤ 10 (c) 5 ≤ e* ≤ 15 (d) 10 ≤ e* ≤ 20
हल: H के लिए: 300-15e ≥ 150 ⇒ e ≤ 10; L के लिए: 150 ≥ 300-45e ⇒ e ≥ 3.33 ⇒ उत्तर: (b) 3.33 ≤ e* ≤ 10 - Q2 (Efficiency Wage): एक फर्म का प्रयास फलन E = 0.4 × w (अधिकतम 100) है। उत्पादकता = E × 50, मजदूरी लागत = w। प्रति श्रमिक लाभ = (E×50) – w। प्रतिस्पर्धी मजदूरी w=300 पर लाभ क्या है? (मानें 0.4×300=120>100, इसलिए E=100)
(a) 4700 (b) 5000 (c) 3000 (d) 2000
हल: w=300, E=100, लाभ = 100×50 – 300 = 5000 – 300 = 4700 ⇒ (a) 4700
🧠 मेमोरी ट्रिक (पूरी 4)
"Doeringer-Piore ने श्रम बाजार को दो भागों में बाँटा (प्राथमिक-द्वितीयक), Stiglitz-Yellen ने बताया कि फर्में प्रतिस्पर्धी मजदूरी से अधिक क्यों देती हैं (दक्षता मजदूरी, बेरोजगारी अनुशासन), और Spence ने बताया कि शिक्षा केवल एक संकेत (signal) है – उत्पादकता बढ़ाने वाला निवेश नहीं!"
✔ पूर्ण प्रारूप – किसी भी शब्द या अंश को हटाया नहीं गया है। सभी 4 योगदानकर्ता, उनके सिद्धांत, पुस्तकें, आलोचना, numerical, MCQ एवं एक-पंक्ति संशोधन सुरक्षित। अतिरिक्त MCQ, Assertion-Reason, Match the Following और Numerical MCQs भी सम्मिलित हैं।
"Doeringer-Piore ने श्रम बाजार को दो भागों में बाँटा (प्राथमिक-द्वितीयक), Stiglitz-Yellen ने बताया कि फर्में प्रतिस्पर्धी मजदूरी से अधिक क्यों देती हैं (दक्षता मजदूरी, बेरोजगारी अनुशासन), और Spence ने बताया कि शिक्षा केवल एक संकेत (signal) है – उत्पादकता बढ़ाने वाला निवेश नहीं!"
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